आईने कुछ तो मेरी, तरफ़दारी ऱख।
मैं बीमार हूँ, चल मेरी बीमारी ऱख।।
वो चला गया जिस पर, तुझे गुरूर था कभी।
अब मेरे चेहरे की फ़क़त, तलबग़ारी ऱख।।
बरसों से बरस रही हैं, बे-मौशम मेरी आँखें।
बारिश में बरस, कुछ तो पर्दादारी ऱख।।
वो चाँद अब, किसी और शहर गया।
रोज़ा कैसे तोड़ेंगे, चल अपनी इफ़्फ़तियारी ऱख।।
ये हयात जब किसी की, अमानत ना रही।
"अश्क़" अब फ़क़त, मौत की तैयारी ऱख।।
मैं बीमार हूँ, चल मेरी बीमारी ऱख।।
वो चला गया जिस पर, तुझे गुरूर था कभी।
अब मेरे चेहरे की फ़क़त, तलबग़ारी ऱख।।
बरसों से बरस रही हैं, बे-मौशम मेरी आँखें।
बारिश में बरस, कुछ तो पर्दादारी ऱख।।
वो चाँद अब, किसी और शहर गया।
रोज़ा कैसे तोड़ेंगे, चल अपनी इफ़्फ़तियारी ऱख।।
ये हयात जब किसी की, अमानत ना रही।
"अश्क़" अब फ़क़त, मौत की तैयारी ऱख।।
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