हां वो शख़्स, आज़ भी मेरा है।।
एक साँस के सिवा, कौन दूसरा है।।
तेरी बेरुख़ी एक, ज़ुर्म ही सही।
तेरी यादों का मुझपर, आज़ भी पहरा है।।
मौत से कह दो, दुश्मनी तोड़ दे मुझसे।
जिंदगी से रिश्ता ही अब जरा जरा है।।
समंदरों को भी हुनर चाहिए, डुबाने का।
जिस कश्ती पर, लहरों का पहरा है।।
मौत से कहना मेरा, इलाज़ ढूंढे "अश्क़"।
इस जिन्दगी का हर ज़ख्म, अब भी हरा है।।
एक साँस के सिवा, कौन दूसरा है।।
तेरी बेरुख़ी एक, ज़ुर्म ही सही।
तेरी यादों का मुझपर, आज़ भी पहरा है।।
मौत से कह दो, दुश्मनी तोड़ दे मुझसे।
जिंदगी से रिश्ता ही अब जरा जरा है।।
समंदरों को भी हुनर चाहिए, डुबाने का।
जिस कश्ती पर, लहरों का पहरा है।।
मौत से कहना मेरा, इलाज़ ढूंढे "अश्क़"।
इस जिन्दगी का हर ज़ख्म, अब भी हरा है।।
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