Sunday, June 28, 2015

जिन्दगी मुझ पर, इतना रहम कर दे।
मेरी साँसे, मेरी दुश्मन कर दे।

महँगी हो गई हैं दवाएं भी, इस दौर में।
कोई फिर से दुआओं का, मौसम कर दे।।

थक गया तेरे सितम से, ए ग़म-ए-हयात।
ये जवानी मेरी, फिर से बचपन कर दे।।

तू मेरे दर्द में शामिल रहे, ता-उम्र।
मेरे सीने में कुछ ऐसा, जख़्म कर दे।।

वादा कर ए काफ़िर, मेरी क़ब्र पे आने का।
मेरे जीने का कुछ तो, भरम कर दे।।

मैं सजू सवरूं हर रोज़, उसे देखकर "अश्क़ "।
मेरे घर का आइना कोई, 'सनम' कर दे।


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