हम उसके दिल में, अपना मक़ाम खोजते रहे।
मेरी तवाहियों का जो, सामान खोजते रहे।।
हम बारिशों में भी बरसे, बादलों का क्या कुशूर।
लोग मेरे आँशुओं का, निशान खोजते रहे।।
वो गया तो खुशबुओं को, समेटकर ले गया।
हम शहर भर फूलों की, दुकान खोजते रहे।।
समन्दर से कह गया, अपनी हद में रहो।
कल तलक जो किनारों पे, मक़ाम खोजते रहे।।
मेंहदी सने हाथोँ को, मासूमियत से दिखाया।
"अश्क" उम्र भर जिसमे हम अपना, नाम खोजते रहे।।
मेरी तवाहियों का जो, सामान खोजते रहे।।
हम बारिशों में भी बरसे, बादलों का क्या कुशूर।
लोग मेरे आँशुओं का, निशान खोजते रहे।।
वो गया तो खुशबुओं को, समेटकर ले गया।
हम शहर भर फूलों की, दुकान खोजते रहे।।
समन्दर से कह गया, अपनी हद में रहो।
कल तलक जो किनारों पे, मक़ाम खोजते रहे।।
मेंहदी सने हाथोँ को, मासूमियत से दिखाया।
"अश्क" उम्र भर जिसमे हम अपना, नाम खोजते रहे।।
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