तलाश -ए -सुकूँ में, सहर हो गई।
रफ़्ता - रफ़्ता यूँ ही, उमर हो गई।।
जुगनुओं अब तुम्हीं , कर दो रौशन शमा।
वो ग़ैरों की, वज्म -ए -क़मर हो गई।।
मेरी माँ से कहना, हवाओं यहाँ।।
दुआ दोस्तों की, बे-असर हो गई।।
शहर की हवा अब, बड़ी बे-वफ़ा है।
तेरे आँचल की फिर से, नज़र हो गई।।
मैं जिंन्दा हूँ या मैं, जिये जा रहा हूँ।
मौत भी मुझसे अब , बेख़बर हो गई।।
यादें सहम कर, दम तोड़ती हैं।
ज़िंदगी "अश्क़" शायद, बसर हो गई।।
रफ़्ता - रफ़्ता यूँ ही, उमर हो गई।।
जुगनुओं अब तुम्हीं , कर दो रौशन शमा।
वो ग़ैरों की, वज्म -ए -क़मर हो गई।।
मेरी माँ से कहना, हवाओं यहाँ।।
दुआ दोस्तों की, बे-असर हो गई।।
शहर की हवा अब, बड़ी बे-वफ़ा है।
तेरे आँचल की फिर से, नज़र हो गई।।
मैं जिंन्दा हूँ या मैं, जिये जा रहा हूँ।
मौत भी मुझसे अब , बेख़बर हो गई।।
यादें सहम कर, दम तोड़ती हैं।
ज़िंदगी "अश्क़" शायद, बसर हो गई।।