जब से वो इस दिल से, दूर हो गया है।
सुना है वो बड़ा, मशहूर हो गया है।।
आँखों को सजा देता हूँ, दिलों के गुनाह को।
ये गुनाह एक उम्र से, भरपूर हो गया है।।
ये एहसान कर चल, मौत की दुआ कर।
जिन्दगी तेरा सितम अब, भरपूर हो गया है।।
हाथ छोड़ दिया उसने, हाथों में रखकर।
उसकी कहानी में कुछ नया, ज़रूर हो गया है।।
मेरा नशीब था मुझसे, दूर जाने वाला "अश्क़ "।
औरों से सुना है वो, बहुत मजबूर हो गया है।।
सुना है वो बड़ा, मशहूर हो गया है।।
आँखों को सजा देता हूँ, दिलों के गुनाह को।
ये गुनाह एक उम्र से, भरपूर हो गया है।।
ये एहसान कर चल, मौत की दुआ कर।
जिन्दगी तेरा सितम अब, भरपूर हो गया है।।
हाथ छोड़ दिया उसने, हाथों में रखकर।
उसकी कहानी में कुछ नया, ज़रूर हो गया है।।
मेरा नशीब था मुझसे, दूर जाने वाला "अश्क़ "।
औरों से सुना है वो, बहुत मजबूर हो गया है।।
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