ज़ख्मो के हिसाब अब, हम नहीं रखते।
वक़्त के सफ़ीने भी जब, मरहम नहीं रखते।।
देखकर कोई इनको, बादल समझ बैठेगा।
जुल्फ़ों को यूँ, बरहम नहीं रखते ।।
दुश्मनी निबाहोगे लाख, हम दोस्त ही रहेंगे।
उनसे कहना कि हम, दुश्मन नहीं रखते ।।
ख़ंजर चलाना है तो मेरे, सीने में उतार दे।
तेरे लिए दिल रखते हैं, जहन नहीं रखते ।।
मुझे डुबाने की, ज़िद न कर समन्दर।
"अश्क"हम रूह रखते हैं, बदन नहीं रखते ।।
वक़्त के सफ़ीने भी जब, मरहम नहीं रखते।।
देखकर कोई इनको, बादल समझ बैठेगा।
जुल्फ़ों को यूँ, बरहम नहीं रखते ।।
दुश्मनी निबाहोगे लाख, हम दोस्त ही रहेंगे।
उनसे कहना कि हम, दुश्मन नहीं रखते ।।
ख़ंजर चलाना है तो मेरे, सीने में उतार दे।
तेरे लिए दिल रखते हैं, जहन नहीं रखते ।।
मुझे डुबाने की, ज़िद न कर समन्दर।
"अश्क"हम रूह रखते हैं, बदन नहीं रखते ।।
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ReplyDeleteKhusboo apke dosti ki, hame mahka jati hai. Apki har bat hame bahka jati hai. Bahut der leti hai aane me sans, har sans k pahale apki yad aa jati hai.
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