आसमां से पूँछ लो, सितारों से पूछ लो।
सरहदों पे शहीद, वतनगारों से पूछ लो।।
मक़सद हमारा अमन, तब भी था अब भी है।
लहू से सनी कश्मीर की, बहारों से पूछ लो।
जाने कितनी जग़ह, उनके सीनों में है।
भरता नहीं वो दिल, ज़ख्म के मारों से पूछ लो।
सुकूं ही सुकूं था, जब एक थे दोनों।
कितना चैन मिला है, दो बटवारोँ से पूछ लो।
आबरू है लुटा, कितनी मांगें हैं उजड़ी।
बिलखती बहनों के बिखरे, सिँगारो से पूछ लो।
अन्जाम - ए - सिनसाई, ग़र यही है "अश्क़ "
क्या कहते हैं हाथोँ में सजे, हथियारोँ से पूछ लो।
सरहदों पे शहीद, वतनगारों से पूछ लो।।
मक़सद हमारा अमन, तब भी था अब भी है।
लहू से सनी कश्मीर की, बहारों से पूछ लो।
जाने कितनी जग़ह, उनके सीनों में है।
भरता नहीं वो दिल, ज़ख्म के मारों से पूछ लो।
सुकूं ही सुकूं था, जब एक थे दोनों।
कितना चैन मिला है, दो बटवारोँ से पूछ लो।
आबरू है लुटा, कितनी मांगें हैं उजड़ी।
बिलखती बहनों के बिखरे, सिँगारो से पूछ लो।
अन्जाम - ए - सिनसाई, ग़र यही है "अश्क़ "
क्या कहते हैं हाथोँ में सजे, हथियारोँ से पूछ लो।
Nice
ReplyDeleteJabardast... Very Nice Lines..
ReplyDeleteSalute to the martyrs and their families.
Thanks my dear sir
Delete