आँसुवों से जलाकर चराग, इस दीवाली में।
उतारेंगे जमीं पे आफताब, इस दीवाली में।।
हसरत तो कतई नहीं है, पीने कि दिल में।
जायेंगे मगर क़दह -ए -शराब, इस दीवाली में।।
तेरे कदीम जख्मो से, उब चुके हैं काफिर।
किसी नए गम का करो इजाद, इस दीवाली में।।
ख्वाबों में शबो -सहर तो, अब भी होती है।
देखने को देख लेंगे और भी ख्वाब, इस दीवाली में।।
हम किसके दिल कि, धड़कन हैं "अश्क " जो।
दिखाएँ महफ़िल -ऐ -ख़ानाख़राब, इस दीवाली में।।
उतारेंगे जमीं पे आफताब, इस दीवाली में।।
हसरत तो कतई नहीं है, पीने कि दिल में।
जायेंगे मगर क़दह -ए -शराब, इस दीवाली में।।
तेरे कदीम जख्मो से, उब चुके हैं काफिर।
किसी नए गम का करो इजाद, इस दीवाली में।।
ख्वाबों में शबो -सहर तो, अब भी होती है।
देखने को देख लेंगे और भी ख्वाब, इस दीवाली में।।
हम किसके दिल कि, धड़कन हैं "अश्क " जो।
दिखाएँ महफ़िल -ऐ -ख़ानाख़राब, इस दीवाली में।।
No comments:
Post a Comment