रात की बड़ी अजब सी कहानी है।
कहीं ख़ामोशी तो कहीं लहरों की रवानी है
टूटकर चाहा हमने उन्हें दोस्तों।
शायद यही मेरी नादानी है।
उनके चेहरे पे उफ़ की शिकन के लिए
अभी आँखों से और भी दरिया बहानी है।
चाँद है तारे हैँ हवा नहीं है।
फिर भी ये रात बड़ी तूफानी है।
मेरे जीने का कुछ तो भरम रखना `अश्क़ `
मयख़ाने में अभी और भी महफिलें सजानी हैं।।
कहीं ख़ामोशी तो कहीं लहरों की रवानी है
टूटकर चाहा हमने उन्हें दोस्तों।
शायद यही मेरी नादानी है।
उनके चेहरे पे उफ़ की शिकन के लिए
अभी आँखों से और भी दरिया बहानी है।
चाँद है तारे हैँ हवा नहीं है।
फिर भी ये रात बड़ी तूफानी है।
मेरे जीने का कुछ तो भरम रखना `अश्क़ `
मयख़ाने में अभी और भी महफिलें सजानी हैं।।
wah wah....behtareen....
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